" गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥"
कई साल पहले "द पाथ विद ए हार्ट" इस वाक्यांश से, कार्लोस कास्टानेडा द्वारा उनके शिक्षक के बारे में लिखी कुछ पुस्तकों के द्वारा मेरा परिचय हुआ [10]।
मुझे तब यह ज्यादा समझ नहीं आया, क्योंकि किताबें बहुत जटिल लगती थीं और ये बातें मेरे सिर के ऊपर से निकल जाती थीं। फिर भी, इस वाक्यांश ने मुझ पर थोड़ा प्रभाव डाला और आगे चलकर, यह स्पष्ट हो गया कि, वह किस बारे में बात कर रहे थे| मैं जिसकी शुरूआत से ही खोज रहा था, यह वही था। मैंने इस अवधारणा को "हृदयपथ" [1] के रूप में अपनाया है। वाक्यांश का यह नया रूप ज्यादा स्पष्ट और कम काव्यात्मक है, और अब हम चर्चा करेंगे कि यह वास्तव में है क्या और क्यों इतना महत्वपूर्ण है।
यह मेरा अनुभव रहा है, कि अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे, आधे सोए हुए, अनजान और लगभग लाश की तरह अपना जीवन जीते हैं। उनका जीवन और कुछ नहीं बल्कि उनकी अपनी इच्छाओं, भय, भावनाओं, सामाजिक दबावों, शारीरिक जरूरतों, पसंद-नापसंद और ऐसे ही अन्य कारणों से उन पर थोपी गई मजबूरियों की एक श्रृंखला है। उनके जीवन के अधिकांश भाग में जीवित रहने से संबंधित गतिविधियाँ होती हैं जैसे - भोजन करना, प्रजनन करना, संबंध बनाना, सुरक्षा सुनिश्चित करना, सामाजिक स्थिति आदि आदि| मतलब की वे ज्यादातर अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ही व्यस्त रहते हैं और अक्सर इन जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा करने के बाद भी, उन्हें इस बात का कोई एहसास नहीं होता कि वे क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और उन्हें क्या करना चाहिए। वे अपना जीवन एक-दूसरे की नकल करते हुए, बेखबर रहकर, गुलामी में बिताते हैं, और फिर वे मर जाते हैं। बेशक, इनमें से कई बहुत खुश, "सफल" प्रतीत होते हैं और कुछ मूल्यवान चीजें भी प्राप्त करते हैं, जो ज्यादातर भौतिक मूल्यों वाली ही होती है। हालांकि, अधिकांशतः वे लोग सुख, हर्ष और ज्ञान के पीछे उदासी, निराशा, दूसरों की अनुसरणता, दु:ख और पीड़ा से भरा हुआ जीवन ही जीते है| अपनी विभिन्न आदतों के साथ, अनेक मान्यताओं के जाल में फसें हुए और अक्सर "श्रेष्ठ" और "महत्वपूर्ण" होने की भावना के साथ वे इस भ्रम में भी रहते हैं की, हर चीज़ उनके नियंत्रण में है और वे पूर्णतया स्वतंत्र है| उनकी शिक्षा, सौंदर्य प्रेम और नैतिकता की भावना ज्यादातर दूसरों से उधार ली हुई होती है, और कुछ दुर्लभ व्यक्ति, जो इन मानदंडों से अलग होने का साहस करते हैं, उन्हें विद्रोही, "भिन्न" या बस "पागल" कहा जाता है।
अब तक, आप सोच रहे होंगे कि मैं ऐसे लोगों के प्रति अत्यधिक नकारात्मक हो रहा हूँ, परन्तु लोगों का ऐसा होना काफी साधारण और सामान्य बात हैं, और शायद मैं अहंकार और अभिमान से भरा हुआ हूँ। यही जीवन है, है ना? आप कह सकते हैं कि उतार-चढ़ाव, सुख-दुख आदि इसका एक हिस्सा हैं और सिर्फ इसलिए कि वे स्वाभाविक रूप से, अपनी सभी इच्छाओं और भय के साथ जी रहे हैं, आप उन्हें "जिंदा लाश" या "दुखी बेवकूफ" नहीं कह सकते हैं।
खैर, इस बात पर मैं आप से सहमत हूं| यह स्वाभाविक है, और ऐसे लोग निश्चित रूप से बेवकूफ नहीं हैं, वास्तव में कई लोग तो बहुत बुद्धिमान और समझदार हैं। मैं बेवकूफों, लाशों या सोए हुए लोगों के बजाय दूसरे शब्द का उपयोग करना पसंद करता हूं, जो है - अज्ञानी। यह शब्द उनकी स्थिति का सबसे सटीक, प्रभावी और तटस्थ तरीके से वर्णन करता है। अज्ञानी वह व्यक्ति होता है जो ज्ञानार्जन के लिए पूरी तरह सक्षम है फिर भी उसके पास कुछ आवश्यक ज्ञान की कमी होती है और यदि वह चाहे तो इसे कभी भी प्राप्त कर सकता है। तो संक्षेप में, यदि इसे पारिभाषिक रूप से कहें तो, ऐसे लोग अज्ञानता के रास्ते पर हैं|
मैंने, स्वयं, अपने जीवन के अधिकांश समय के लिए उस पथ पर यात्रा की, और मुझे अभी भी यकीन नहीं है कि क्या मैंने किसी अन्य बेहतर पथ पर मोड़ लिया है या फिर मैं अभी भी उसमें खो गया हूं।
किसी प्रकार से यह विषय बहुत नकारात्मक लग रहा है, इसलिए इस पर निष्पक्ष रहते हुए अब मैं अज्ञानी के प्रकार के बारे में कुछ सकारात्मक बिंदुओं का उल्लेख करूंगा। मेरे अनुभव में, ऐसे लोग अक्सर बहुत अच्छे स्वभाव वाले, विनम्र, मददगार, आज्ञाकारी, मेहनती, अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पित, सहानुभूति रखने वाले, कानून का पालन करने वाले होते हैं, और उनमें कई अन्य मानवीय गुण भी होते हैं। परन्तु, जब ऐसे व्यक्ति का कठिन परिस्थितियों (जैसे अकाल या युद्ध) के तहत परीक्षण और समीक्षण किया जाता है, तो ये लक्षण टूट जाते हैं और हम उसी व्यक्ति में पशुवादी प्रकृति को देख पाते हैं। ऐसे लोग वैसे भी बहुत कम नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे शक्तिहीन होते हैं और बाहरी परिस्थितियों की दया पर निर्भर होते हैं। वे भी उन्हीं सब कारणों की वजह से कुछ ज्यादा अच्छा नहीं कर पाते हैं।
फिर दूसरे वे लोग भी हैं, जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के बाद एक ऐसी जगह पर पहुँच जाते हैं जहां उन्हें एक बड़ा शून्य, एक खालीपन, अर्थहीनता की भावना और उद्देश्य की कमी मिलती है। उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे कहीं कुछ छूट गया है। पर वे नही जानते की वह क्या है इसलिए, वे संघर्ष करते हैं, और अक्सर पराकाष्ठा तक जाकर, उसे सांसारिक चीजों में खोजने की कोशिश करते हैं| ऐसे लोग अत्यधिक महत्वाकांक्षी, उद्यमी, राजनेता, राजा होते हैं और "सफलता" की सीढ़ी पर बहुत ऊँचे चढ़े हुए होते हैं| चूहे की दौड़ में हमेशा आगे रहते हैं। ऐसे लोग समाज मे विजेता और प्रेरणा का स्त्रोत होते हैं। वे अमीर और संपन्न, करिश्माई और शक्तिशाली होते हैं। वे एक असाधारण जीवन जीते हैं और सभी वस्तुओं और भौतिक गतिविधियों के माध्यम से अपने शून्यता के अनुभव को भरने की कोशिश करते रहते है।
अब आप समझ गए होंगे कि ऐसे लोग बिल्कुल सही रास्ते पर हैं, फिर भी मैं उनका ऐसा गुणगान क्यों गा रहा हूं? यह एक आदर्श जीवन की तरह दिखता है, जिसका हर कोई सपना देखता है। खैर, नहीं... इसका एक नकारात्मक पहलू भी है। शून्य को बाहरी साधनों से नहीं भरा जा सकता है और ऐसा इसलिए नहीं है की, उनके पास भौतिक या सामाजिक रूप से किसी चीज की कोई कमी है। शून्य हमेशा बना रहता है और उसे भरने के लिए वे संघर्षरत रहते हैं पर इसे भर नहीं पाते है। उनके लिए कुछ भी पर्याप्त नहीं होता, वे कभी आनंदित नहीं होते और कभी संतुष्ट नहीं होते है। उनका जीवन सतही है, वे अंदर से दुखी हैं जबकि बाहर दिखावा कर रहे हैं, वे अभी भी अज्ञानी हैं| हालांकि, वे कगार पर हैं। अक्सर यही पीड़ा उन्हें सही रास्ते पर धकेलने के लिए काफी होती है। यह एहसास उन्हें देर से होता है, अक्सर बहुत देर से, क्योंकि वे अधिक से अधिक पाने में व्यस्त होते हैं, "सफल" होने में व्यस्त होते हैं।
उन्हें एक बड़ा डर होता है, सब कुछ खोने का डर, वे हमेशा दूसरों की दया पर रहते हैं, और जो उन्हें "श्रेष्ठ" महसूस करा सकता है, और उन्हें बता सकता है कि उनके पास यह सब है। रेगिस्तान में एक राजा राजा नहीं होता, उसे दूसरों की जरूरत होती है जिन पर वह शासन कर सके। रेगिस्तान में एक अमीर आदमी अमीर नहीं होता, उसे अमीर महसूस करने के लिए अपने आसपास गरीबों की जरूरत होती है। प्रसिद्धि को जीवित रखने के लिए एक प्रसिद्ध व्यक्ति को दूसरों की आवश्यकता होती है। दूसरों पर निर्भरता, जो उनकी उपलब्धियों पर भारी पड़ती है, उनके दुखों का स्रोत है। वे केवल दूसरों का उपयोग कर सकते हैं, वे उनके स्वामी नहीं हो सकते, वे यह जानते हैं और इससे डरते हैं। वे अच्छे अवसरवादी होते हैं और मौके का फायदा उठाने में अच्छे हैं। ऐसे लोग बहुत लालची, हिंसक, अहंकारी और ईर्ष्यालु हो जाते हैं। शक्तिशाली पदों पर होने के कारण ये बहुत बड़ा नुकसान कर सकते हैं। उनमें बहुत अच्छा करने की क्षमता भी होती है, हालांकि यह शायद ही कभी देखा जाता है क्योकि मानवीय कार्यों के पीछे हमेशा कोई न कोई छिपा हुआ मकसद होता है। वे झूठ से लोगो को गुमराह करते हैं, हेरफेर करते हैं और अपने कामों को सही ठहराते हैं। और यह सब किस लिए? वे नहीं जानते। वे केवल बेहोशी से महसूस कर सकते हैं कि यह सब वह नहीं है जो वे करना चाहते हैं, उन्हें लगता है कि उन्हें कुछ और चाहिए। वे प्यार, सच्ची दोस्ती, सादगी के लिए तरसते हैं और ये सब उनकी मुट्ठी से रेत की तरह फिसलता जाता हैं।
इनका एक प्रकार और है जो थोड़ा मध्यस्तरीय हैं। ऐसे लोग अपने भीतर के शून्य को अन्य चीजों के माध्यम से भरने की कोशिश करते हैं, सभी बाहरी माध्यमों से, परन्तु उतने बड़े पैमाने पर नहीं। कुछ लोग मादक द्रव्यों के सेवन या जुआ खेलने में पड़ जाते हैं, या उनके अधिक से अधिक संबंध, विवाह और बच्चे होते हैं। कुछ अधिक से अधिक खाते हैं और मोटे हो जाते हैं। कुछ जमाखोरी का सामान, ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाते हैं, ज्यादा खपत करते हैं, ज्यादा चमकदार महंगी चीजें खरीदते हैं। वे पाते हैं कि जो कुछ वे चाहते हैं उसे प्राप्त करने और अपनी इच्छा या आवश्यकता से अधिक प्राप्त करने के बावजूद, खुशी मायावी और क्षणभंगुर ही रहती है। इच्छाएँ और वासनाएं अनंत रूप से विस्तारित होती प्रतीत होती हैं, नही के बराबर या फिर क्षणिक संतुष्टि देते हुए, वे वास्तव में दुख का स्रोत बन जाती हैं। कुछ लोग उदास और आलसी हो जाते हैं क्योकिं वे, यह नहीं जानते कि खालीपन को कैसे ठीक किया जाए। वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि जब उनके पास वह सब कुछ है जिसकी उन्हें जरूरत है, और शायद जरूरत से ज्यादा होने पर भी वे दुख क्यों है।
यह मेरा अनुभव भी रहा है। एक अच्छे जीवन के लिए जो कुछ भी करने की आवश्यकता है उसे करने के बाद, एक अच्छे जीवन के लिए जो कुछ भी आवश्यक हो सकता है उसे इकट्ठा करने और जितने चाहें उतने रिश्ते और मित्रता प्राप्त करने के बाद, मुझे बिल्कुल भी शांति नहीं मिली। मैंने इस रास्ते पर भी बहुत लंबे समय तक यात्रा की है। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि क्या मैंने इस जीवन शैली को पूरी तरह से त्याग दिया है।
अज्ञानता का मार्ग छोड़ने की कोई बाध्यता नहीं है, इसे प्रतिबंधित करने के लिए कोई प्राकृतिक नियम नहीं हैं।घबराने की जरूरत नहीं है, इस पर यात्रा करते हुए कोई भी अपना पूरा जीवन जी सकता है, बिल्कुल सामान्य रूप से। लेकिन इसके परिणाम हैं, और हम बाद में चर्चा करेंगे कि वे क्या हैं, या फिर क्या हो सकते हैं। निश्चित रूप से, उन कारणों में से एक कारण है दुःख, सुनने मे यह उतना अच्छा नहीं लगता और अच्छी खबर यह है कि कई मामलों में इससे बचा जा सकता है। कभी-कभी केवल एक संकेत आवश्यक होता है और व्यक्ति को जल्दी ही पता चल जाता है कि वह गलत दिशा में जा रहा है| इस प्रकार सही रास्ता खोजने के लिए संघर्ष शुरू होता है।
अब हम एक और प्रकार पर पहुंच गए हैं, इस तरह के लोग दुर्लभ हैं और मैंने ऐसे कुछ ही लोगों को देखा है।उन्होंने या तो ऊपर के रास्तों में गड्ढों को पहचान लिया है या पहले ही उनमें से अधिकांश में गिर चुके हैं, और किसी तरह बच गए और फिर उन्होंने एक बेहतर रास्ता खोज लिया। ऐसे लोगों की पहचान है उनका आजादी से प्यार। वे मुक्त होना चाहते है, हर चीज से मुक्त होना चाहते है। वे वास्तव में कुछ ऐसा कर रहे हैं जिसको वे करना पसंद करते हैं और इसलिए नहीं कि उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया था, या वे किसी की नकल नहीं कर रहे हैं। वे किसी चीज से बंधे नहीं हैं, यहां तक कि उन चीजों से भी नहीं जिन्हें वे प्यार करते हैं। उनके व्यक्तित्व में अधिक अहंकार, भारीपन या जड़ता नहीं है। वे बदलाव से प्यार करते हैं और उससे डरते नहीं है। वे साहसी और निर्भीक होते हैं। किसी भी प्रकार की आदतों, विश्वासों और उपदेशों से मुक्त, वे किसी भी चीज से नहीं चिपके रहते हैं और कुछ भी उनसे चिपकता नहीं है।
एक गहन जिज्ञासा, खुला दिमाग, अच्छा संशयवाद और ज्ञान के लिए महान प्रेम, यह सब उनकी विशेषताऐं है। उन्हें सीखना और पढ़ाना पसंद होता है। वे हर चीज पर सवाल उठाते हैं और कुछ भी युहीं नहीं मानते, उन्हें बेवकूफ बनाना आसान नहीं है। रचनात्मकता उनका स्वभाव है। वे कलाकार, वैज्ञानिक, लेखक, दार्शनिक और आध्यात्मिक साधक या प्रबुद्ध गुरु हैं [3]। स्वतंत्रता को सुख का सार मानते हुए, वे दूसरों को नियंत्रित करना पसंद नहीं करते हैं और सत्ता की तलाश नहीं करते हैं। वे बहुत सारी भौतिक चीजों के मालिक होने से कतराते हैं और अपने आसपास संबंधियों की भीड़ इकट्ठा करने से बचते हैं।
ये लोग कुछ जानते हैं - कुछ बहुत मूल्यवान। वे यह जानते हैं कि उन्हें वो करना है, जो उनका दिल कहता है, न कि वो जो दूसरे कहते हैं। वे अज्ञान और दुख के रास्तों को ठुकराते हैं, और सुख के मार्ग की यात्रा करते हैं। वे जानते हैं कि खुशी अंदर से आती है, जो उन्हें करना पसंद है उसे करने से आती है। वे भौतिक चीजों, दोस्तों, संबंधों, समाज, मनोरंजन आदि का आनंद तो लेते हैं, लेकिन उनसे पूरी तरह से अलग और अविचलित रहते हैं। उनका दिल उन्हें बार-बार अपने रास्ते पर वापस खींच लेता है।
ये लोग खुशी की कुंजी जानते हैं। वे कुछ इच्छा करते हैं, लेकिन जब वो इच्छा पूरी नहीं होती हैं तो वे अप्रभावित रहते हैं।वे बुनियादी जरूरतों के लिए चीजें हासिल करते हैं, लेकिन हमेशा एक रेखा खींचते हैं और जानते है की कहां जरूरत खत्म होती है और कहाँ लालच शुरू होता है। वे विलासिता का आनंद लेते हैं, लेकिन इसके मालिक कभी नहीं बनते।उनका प्यार बिना किसी शर्त का होता है, जहाँ सभी को देना का भाव होता है, दूसरों से लेने का नहीं| उनके संबंध बिना किसी लगाव और बिना किसी अधिकार के होते हैं| वे देना पसंद करते हैं, लेना नहीं। वे कभी किसी का आंकलन नहीं करते और सभी स्थितियों में स्थिर रहते हैं। वे सभी नियमों का सम्मान करते हैं, लेकिन उनसे कभी बंधे नहीं होते हैं और जितनी जल्दी हो सके उनकी स्वतंत्रता को कम करने वाली किसी भी स्थिति से बाहर निकल जाते हैं।
ऐसे लोगों के गुण यहां उल्लेख करने के लिए बहुत अधिक हैं, इसलिए मैं इसे एक अलग लेख के लिए रखूंगा। फिर इनकी कमियों के बारे में क्या कहेंगे? क्या उनमें कोई बुरा गुण होता है? मैं वास्तव में नहीं जानता, लेकिन मैंने देखा है कि लोग उनसे डरते हैं, उनसे नफरत करते हैं, उनका उपहास करते हैं और उन्हें खतरनाक मानते हैं। लेकिन ऐसा करने वाले लोग अज्ञानी होते हैं, वे स्वतंत्रता से घृणा करते हैं और किसी ऐसे व्यक्ति से डरते हैं जो उनके द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। मैं एक पूरी किताब लिख सकता हूं कि "समाज" ऐसे लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है और क्यों करता है, लेकिन मुझे लगता है, यह ज्यादा उपयोगी नहीं होगा।
जाहिर है, ऊपर वर्णित प्रकार किसी भी स्पष्ट रूप से परिभाषित श्रेणियों में नहीं आते हैं, सभी प्रकार की विविधताएं, मिश्रण और मिलाप होता हैं। यह सब संभावनाओं के पूर्ण विस्तार पर कब्जा कर लेता है।
इसलिए मैं, हृदयपथ को एक जीवन शैली के रूप में परिभाषित करता हूं जो शांति, खुशी और संतुष्टि से भरे जीवन की ओर ले जाती है। यह एक व्यक्ति को ऊपर वर्णित गुणों वाले व्यक्ति में बदल देता है। [4]
"जीना एक दिखावटी, औसत दर्जे की, अनुशासित चीज़ नहीं है जिसे हम अपना अस्तित्व कहते हैं। जीना कुछ अलग है; यह प्रचुर मात्रा में समृद्ध है, कालातीत रूप से बदल रहा है, और जब तक हम उस शाश्वत गति को नहीं समझते हैं, तब तक हमारे जीवन का बहुत कम अर्थ होगा।"
— जिद्दू कृष्णमूर्ति
एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है - कोई अपने हृदयपथ की राह कैसे खोज सकता है? क्या यह सभी के लिए समान है? क्या हर किसी को वैज्ञानिक/कलाकार/योगी होने की जरूरत है या उस रास्ते पर जाने के लिए ओर कुछ भी होना चाहिए? ये तीन सवाल हैं... और मेरे अनुभव में इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। ऐसा लगता है कि जब आप तैयार होते हैं तो रास्ता आपको मिल जाता है। जब आपने तरह-तरह के उपाय किए हैं और वे आपको संतुष्ट नहीं कर पा रहे हो और आप डगमगाते रहते है, आप अपनी स्थिति से अवगत होते हैं और समाधान खोजने के लिए कुछ प्रयास करते हैं, तो आपको हृदयपथ दिखाई देता है। यह सभी के लिए एक जैसी नहीं होती है, लेकिन अधिकतर बहुत सारी समानताएं होती है और शायद ही कभी कुछ बिल्कुल ही अलग होता है। एक निश्चित विषय है जो ऐसे सभी रास्तों, स्वतंत्रता, खुशी की खोज, ज्ञान आदि के लिए सामान्य प्रतीत होता है। इसका ज्यादातर संबंध स्वयं से है, स्वयं का सुधार है, और जहाँ स्वयं की सहायता हो उन्ही परिस्तिथियों मे दूसरों के साथ व्यवहार होता है। तो क्या दूसरों की मदद करना और दुनिया को बचाना आपका रास्ता है? हो सकता है, लेकिन मुझे संदेह है कि यदि आप अज्ञानी और दुखी हैं तो आपको ऐसा करने में बहुत सफलता मिलेगी भी। इसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। इसलिए यदि आपको संदेह है कि कोई रास्ता आपके लिए है या नहीं, तो जांच लें कि क्या आप स्वयं इससे कुछ प्राप्त कर रहे हैं। यदि आप कष्ट उठा रहे हैं और इसे अपनाकर दूसरों को कष्ट दे रहे हैं, तो यह आपका मार्ग नहीं है।
यहाँ उन लोगों की मदद लेने की सलाह दी जाती है जो पहले से ही सही रास्ते पर हैं। हालाँकि, आप केवल उनका अनुसरण नहीं कर सकते, वे अपने पथ पर हैं, आपके पथ पर नहीं। आप ऐसे शिक्षकों को ऊपर बताए गए कुछ गुणों से पहचान लेंगे।(यहाँ कोई नियम नहीं है, आपको गलत शिक्षक भी मिल सकते हैं, इसलिए सावधान रहें)। वे जो करते हैं या कहते हैं उसकी केवल नकल करने से कोई मदद नहीं मिलने वाली है| यह वह नहीं है जो वे करते हैं, यह इस बारे में है कि वे क्या हैं।आपको उनके होने के सार को देखना चाहिए और अपने स्वयं पर चिंतन करके अपने स्वयं के सार को खोजने का प्रयास करना चाहिए। एक बार जब आप एक शिक्षक से कुछ हासिल कर लेते हैं तो उसे छोड़ दें। वैसे भी वे आपके साथ ज्यादा समय तक नहीं रहेंगे। वे तुम्हें केवल मार्ग दिखा सकते हैं, तुम्हें उस पर उठाकर नहीं चल सकते है। आपको अपने दिल की राह पर चलना सीखना चाहिए।
हर किसी का एक अनूठा रास्ता होता है, हालांकि समानताएं और संकेत हैं। आप किसी और के बताए रास्ते पर नहीं चल सकते, क्योंकि वह रास्ता उनके दिल का है, आपके दिल का नहीं। यह कहीं नहीं ले जाएगा, कुछ उत्साह और रोमांच हो सकता है, लेकिन आप अंत में अधूरे रह सकते हैं। यह रास्ता किसी पेशे या नौकरी, एक विश्वविद्यालय की डिग्री या एक कौशल द्वारा चिह्नित नहीं है, यह कुछ ऐसा है जो आपको आकर्षित करता है इसलिए नहीं कि यह पैसे देता है या प्रसिद्धि लाता है या आपके दोस्त इस पर चल रहे हैं, बल्कि इसलिए कि आप गहराई से महसूस करते हैं कि यह आपका है| आपके पथ का शायद ही कभी दूसरों से कोई लेना-देना हो, यह आपके बारे में होना चाहिए। अपने पथ को पहचानने में कुछ समय लगता है या शायद बहुत समय लगता है। हम इसे आसानी से पहचानने के लिए दूसरों द्वारा बहुत गहराई से प्रेरित और जबरदस्ती मत परिवर्तन होते देख रहे हैं, खासकर बचपन के दौरान।
एक और सवाल उठता है कि अगर आप अपने दिल के रास्ते पर हैं तो आपको कैसे पता चलेगा? यह आसान है, आपको हमेशा बढ़ती खुशी और शांति मिलेगी। दुख के क्षण दिखाई देंगे, लेकिन जल्द ही गायब हो जाएंगे। यह आपको एकदम साफ साफ दिखाई देगा। सुख और शांति के अधिक क्षण और दुख और पीड़ा के दुर्लभ अवसर होंगे। [5] आप पाएंगे कि आप ऊपर बताए गए गुणों को बिना गहन प्रयास के प्राप्त कर रहे हैं। आप उन गुणों को किसी और तरीके से, कोशिशों से या लंबे प्रयास से प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन यह अप्राकृतिक है और समय की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। इन गुणों को प्राप्त करना लक्ष्य नहीं है, लक्ष्य अपने हृदय के मार्ग पर चलना है, अन्य चीजें सिर्फ फल हैं जिन्हें आप अपने रास्ते रूपी पेड़ों से पा सकते हैं।
क्या यह रास्ता कभी खत्म होता है? क्या इसके अंत में खजाना होगा? मेरी राय में (मेरे अनुभव में नहीं), यह कभी खत्म नहीं होता, यह चलता रहता है। यह वह यात्रा है जो पूरा कर रही है, कोई मंजिल नहीं है। इसके विपरीत, यदि आप पाते हैं कि यह कहीं समाप्त होता है, और आप एक बड़ी दीवार का सामना कर रहे हैं, भ्रमित, अटके हुए हैं, यह नहीं जानते कि आगे क्या करना है, तो आप जानते हैं कि यह आपका रास्ता नहीं था, यह गलत रास्ता था! तब आप आराम करो, सोचो और एक मोड़ लो। हो सकता है कि ऐसे हालात तब भी हों जब आप दिल के सच्चे रास्ते पर हों, लेकिन वे जल्दी से गुजर जाते हैं और हम उनसे कुछ सीखते हैं।इसलिए अपने पथ के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आपको थोड़ा धैर्य रखने की आवश्यकता है। इसे स्वयं प्रकट होने दें।
अंतिम प्रश्न - क्या मुझे पहले से ही अपना रास्ता मिल गया है? नहीं, मैं अभी भी देख रहा हूँ। मुझे दिशा-निर्देशों के बारे में थोड़ा पता है और मुझे सुरंग के दूर छोर पर कुछ प्रकाश दिखाई दे रहा है। उम्मीद है कि यह रेलवे सुरंग नहीं है ;-)। मैं शिक्षक नहीं हूं, केवल एक छात्र हूं।
क्या मुझे यह सब अपने आप पता चला? या क्या मैं इसे मन से बना रहा हूँ? नहीं, ऐसे कई लोग हैं जो कुछ इसी तरह की राह की ओर इशारा करते हैं। मैं केवल वही दोहरा रहा हूं जो महान गुरु सिखाते हैं। कृष्ण स्वधर्म [6] नामक एक अवधारणा सिखाते हैं, जिसकी कई तरह से व्याख्या की जाती है, मैं बस इसे हृदयपथ के रूप में समझता हूं, आप अपना चयन स्वयं करें। पश्चिमी दर्शन में एंटेलेची [7] की अवधारणा है जिसे मैं "आंतरिक अंतिम लक्ष्य" के रूप में व्याख्या करता हूं, जो हृदय के पथ की अवधारणा के बहुत करीब है। यौगिक दर्शन मुक्ति (मुक्ति या स्वतंत्रता) को किसी के जीवन का अंतिम लक्ष्य होने पर जोर देते हैं, और स्वतंत्रता हृदयपथ का केंद्रीय विषय है, मुझे लगता है कि यह सबसे करीब आता है। [8] गौतम बुद्ध ने दुख को समाप्त करने की लक्ष्य के रूप में सिफारिश की है, जो अज्ञान को समाप्त करने के लिए एक निश्चित मार्ग का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करता है - दुख का कारण। मैं इन महान शिक्षाओं पर टिप्पणी करने के योग्य नहीं हूं, इसलिए कृपया कोई उपयुक्त सामग्री खोजें और पढ़ें। [9] यह सब बहुत विशाल है और यह सब समझने के लिए आपको एक अच्छे शिक्षक की आवश्यकता हो सकती है। कुंजी केवल इन शिक्षाओं को पढ़ना नहीं है, बल्कि उनका पालन करना, उन्हें लागू करना है। आप जल्द ही पाएंगे कि इस तरह के सभी दर्शन और दूसरों के अनुभव, चाहे वे कितने भी महान क्यों ना हों, उनकी कुछ सीमाएँ हैं, वे उनके मार्ग का अनुसरण करके प्राप्त किए गए उनके अनुभव हैं। आपको अपने दिल के रास्ते पर चलने की जरूरत है।
टिप्पणियाँ:
[1] इस मार्ग को "भक्ति के मार्ग" या श्रद्धा के मार्ग के साथ भ्रमित ना करें।
[2] मैं इस शिक्षा के लिए सद्गुरु जग्गी वासुदेव का आभारी हूं - मजबूरी की एक श्रृंखला के रूप में सामान्य जीवन।
[3] ध्यान दें कि उल्लेखित "व्यवसायों" में कई लोग हैं, उदाहरण के लिए कुछ "वैज्ञानिक" सिर्फ एक वैज्ञानिक का काम कर रहे हैं, जिन्होंने कभी भी, कुछ भी असाधारण नहीं खोजा या आविष्कार नहीं किया, और कुछ "कलाकार" केवल कुशल श्रमिक हैं, जिनकी रचनात्मकता कम है| जाहिर है, ये सूची में शामिल नहीं हैं। मैं उनके लिए कला-कर्मी या विज्ञान-कर्मी कहना पसंद करता हूं।
[4] ध्यान दें कि "हृदय" शब्द का प्रयोग यहाँ लाक्षणिक रूप से किया जा रहा है, उदाहरण - ज्वालामुखी का हृदय - इसका सबसे गर्म केंद्र। इसका आपके शरीर के अंदर रक्त पंप करने वाले अंग से कोई लेना-देना नहीं है। इसका सीधा सा अर्थ है आपके अस्तित्व का केंद्र, जहां आप महसूस करते हैं कि आप हैं और उसके अनुरूप कार्य करते हैं।
[5] दर्द, जैसे मानसिक दर्द में होता है, शारीरिक नहीं। कोई भी रास्ता या जीवन शैली शारीरिक पीड़ाओं के उन्मूलन का आश्वासन नहीं देती है, हालांकि उनके कारण होने वाली पीड़ा को कम किया जा सकता है।
[6] कुछ व्याख्याओं के लिए यह लिंक देखें या इसे गूगल करें: http://www.bhagavad-gita.org/Gita/verse-03-35.html
[7] https://en.wiktionary.org/wiki/entelechy से
एक विशेष प्रकार की प्रेरणा, आत्मनिर्णय की आवश्यकता, और जीवन और विकास को निर्देशित करने वाली आंतरिक शक्ति सभी को एक बनने में सक्षम है; किसी के विश्वासों को साकार करने की आवश्यकता; व्यक्तिगत दृष्टि और उस दृष्टि को भीतर से साकार करने की क्षमता दोनों होना।
उपलब्धि हमारे आंतरिक गतिशील उद्देश्य को दिया गया नाम है। यह क्षमता का बीज है जो हमारे भीतर गहराई से बसता है, जिसमें अंशिक छवि होती है कि हम वास्तव में कौन हैं और हम क्या बन सकते हैं। ग्रीक दार्शनिक सुकरात ने सबसे पहले एंटेलेची शब्द गढ़ा था, और महान रहस्यवादी [पियरे] टेइलहार्ड डी चारडिन ने इसे लोगों के ध्यान में लाया। [...] उद्देश्य की आंतरिक भावना जो एंटेली द्वारा शासित होती है, वह हमारे जीवन के पीछे की प्रेरक शक्ति है, जो हमें स्वयं की पूर्ण अभिव्यक्ति में मदद करती है।
- लिसा तेनज़िन-डोल्मा, माइंड एंड मोटिवेशन: द स्पिरिट ऑफ़ सक्सेस
[8] मैं इन अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझाने के लिए सिफू रोहित आर्य का आभारी हूं। देखें https://www.youtube.com/watch?v=qbCtvnAn5y0
[9] उदाहरण के लिए यहां देखें:
http://www.vipassana.com/resources/8fp1.php
http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/bodhi/waytoend.html#ch1
[10] उद्धरण:
"कुछ भी लाखों रास्तों में से एक है। इसलिए आपको हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि एक रास्ता केवल एक रास्ता है; अगर आपको लगता है कि आपको इसका पालन नहीं करना चाहिए, तो आपको किसी भी परिस्थिति में इसके साथ नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्पष्टता के लिए आपको नेतृत्व करना चाहिए। एक अनुशासित जीवन होगा, तब ही आपको पता चलेगा कि कोई भी रास्ता केवल एक रास्ता ही है और अगर आपका दिल आपको ऐसा करने के लिए कहता है तो उसे छोड़ने में खुद का या दूसरों का कोई अपमान नहीं है। लेकिन रास्ते पर चलने का निर्णय आपका होना चाहिए या इसे छोड़ने के लिए डर या महत्वाकांक्षा से मुक्त होना चाहिए। मैं आपको चेतावनी देता हूं। हर रास्ते को बारीकी से और विचार-पूर्वक देखें। जितनी बार आप इसे आवश्यक समझें, कोशिश करें।
यह सवाल एक बहुत बूढ़ा आदमी ही पूछता है। क्या इस रास्ते में कोई दिल है? सभी रास्ते एक जैसे हैं: वे कहीं नहीं ले जाते। वे रास्ते हैं जो झाड़ी से होकर, या झाड़ी में जा रहे हैं। अपने जीवन में मैं कह सकता था कि मैंने लंबे-लंबे रास्ते पार कर लिए हैं, लेकिन मैं कहीं नहीं हूं। क्या इस रास्ते में कोई दिल है? अगर ऐसा होता है, तो रास्ता अच्छा है; अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह किसी काम का नहीं है। दोनों रास्ते कहीं नहीं जाते; लेकिन एक के पास दिल है, दूसरे के पास नहीं| एक आनंदमय यात्रा के लिए है; जब तक आप इसका अनुसरण करते हैं, आप इसके साथ एक हैं। दूसरा आपको अपने जीवन को श्राप देने जैसा लगता है। एक आपको मजबूत बनाता है; दूसरा आपको कमजोर करता है।
किसी भी रास्ते पर चलने से पहले सवाल पूछें: क्या इस रास्ते में दिल है? यदि उत्तर नहीं है, तो आप इसे जान लेंगे, और फिर आपको दूसरा रास्ता चुनना होगा। मुसीबत यह है कि कोई सवाल नहीं पूछता; और जब एक आदमी को अंततः पता चलता है कि उसने बिना दिल के रास्ता ले लिया है, तो रास्ता उसे मारने के लिए तैयार है। उस समय बहुत कम पुरुष विचार-विमर्श करने के लिए रुकते हैं, और रास्ता छोड़ पाते हैं। दिल के बिना रास्ता कभी सुखद नहीं होता। इसे लेने के लिए भी आपको काफी मेहनत करनी पड़ती है। दूसरी तरफ दिल से राह आसान होती है। इसे पसंद करने के लिए यह आप पर कोई काम नहीं करता है।"
- कार्लोस कास्टानेडा, द टीचिंग्स ऑफ़ डॉन जुआन: ए याकी वे ऑफ़ नॉलेज
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