रविवार, 27 मार्च 2022

अस्तित्व, अनुभव और ज्ञान

 


साल्वाडोर डाली के द्वारा 

होने का अनुभव  

एक बात बहुत निश्चित है - कुछ विद्यमान है। वास्तव में केवल यही मेरे लिए निश्चित है। मेरे पास कोई ज्ञान नहीं है, और कोई ऐसा अनुभव भी नहीं है जो इतना निश्चित लगता हो। बस कुछ है |  मैं उस "कुछ" को अस्तित्व शब्द से परिभाषित करता हूं। यह बस एक शब्द है जो उस निश्चितता का सूचक है | अस्तित्व एक प्रक्रिया द्वारा गतिमान हो रहा है, जिसे मैं अनुभवक्रिया कहूंगा, और अनुभव शब्द इस प्रक्रिया का संज्ञा रूप है| मैं या दूसरा कोई ओर कितना भी प्रयास कर ले, इस बात का खंडन नहीं कर पायेगा कि अस्तित्व है। इनकार करना या इसको गलत साबित करना भी एक अनुभव ही है, और यह पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है कि अनुभवक्रिया/या अस्तित्व है। इतना आश्वस्त, इतना ठोस, इतना आत्म-स्पष्ट और क्या हो सकता है? तो हम यहां एक बहुत ही दृढ़ आधार पर हैं जो, एक अच्छी शुरूआत है, या फिर कहे की यही से कोई भी शुरुआत हो सकती है।

अस्तित्वनाद या अस्तित्व में परिवर्तन अनुभवक्रिया को जन्म देते हैं। बस इतना ही है, बाकी सबकुछ उसका विवरण मात्र है।यह अस्तित्व क्या चीज है? मुझसे मत पूछिये, और इसमें ये नाद परिवर्तनादि हो ही क्यों रहे हैं, यह कैसे और क्यों हो रहा है... मुझे इसका कोई ज्ञान नहीं है। महाऋषि और पंडित इस सब के बारे में क्या कहते हैं, यह जानने के लिए आप तत्वविज्ञान की कोई अच्छी किताब पढ़ लीजिये। मैं आपको आश्वशन देता हूं कि यह कोई भी नहीं जानता है । यह बहुत ही विरोधाभासी है कि कुछ इतना परिचित, स्पष्ट और प्रत्यक्ष है पर फिर भी अज्ञात है! खैर, मनीषियों के देश में आपका स्वागत है, उम्मीद है की यह आपका पहला आश्चर्य नहीं है....